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दीपावली मनाने के पीछे कारण (Reasons behind celebrating Deepawali)

 

दीपावली मनाने के पीछे कारण (Reasons behind celebrating Deepawali)

Reasons Behind Celebrating Deepawali (दीपावली मनाने के पीछे कारण)


प्रिय पाठकों, आप सभी का इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत हैं । साथ में दीपावली के पावन पर्व की आप सभी को हमारी तरफ से खूब खूब बधाई एवं शुभकामनाए ।

आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे कि आखिर हम दीपावली क्यूँ मनाते हैं? दीपावली मनाने के पीछे क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

दीपावली-

दीपावली को दीप पर्व या दीपों का त्योहार (Festival of Lights ) भी कहा जाता हैं। दीपावली शब्द की उत्पति संस्कृत भाषा के दो शब्दों दीप और आवली शब्दों के मिश्रण से हुई हैं । दीप का अर्थ हैं – दीया तथा आवली शब्द का अर्थ हैं – कतार या श्रंख्ला ।
यानि दीपावली का अर्थ हुआ- दीपों की कतार ।

दीपावली (दीवाली ) शरद ऋतु के आगमन के समय मनाए जाने वाला एक प्राचीन हिन्दू त्योहार हैं। यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता हैं । अंग्रेजी महीनों के अनुसार यह अक्टूबर या नवंबर महीने में आता है। इस त्योहार के आगमन पर सभी लोग अपने घरों में साफ सफाई करते हैं। नए-नए परिधान पहनते हैं। मीठे पकवान बनाते हैं। एक- दूसरे को स्नेह भाव देते हैं।
लेकिन हमे यह पता नहीं होता हैं कि आखिर दीपावली मनाने के पीछे क्या-क्या कारण हैं ? हम दीपावली क्यूँ मनाते हैं? इसके पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं, जिन्हें हमें अवश्य जानना चाहिए।

 

दीपावली मनाने के पीछे धार्मिक कारण (Religious view behind celebrating Deepawali)

1. कहा जाता हैं कि जब भगवान श्री राम 14 साल के वनवास के बाद वापस अयौध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने अपने राजा श्री राम के आगमन के खुशी में पूरे नगर में दीप जलाकर उनका स्वागत किया। तब से दीपावली मनाई जाती हैं।

2. दूसरी मान्यता के अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वाढ करके अपनी प्रजा को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई, तो द्वारिका कि प्रजा ने दीप जलाकर भगवान श्री कृष्ण को धन्यवाद ज्ञापित किया।

3. एक अन्य धारणा के अनुसार सतयुग में जब समुद्र मंथन हुआ, तब धन्वंतरि और धन की देवी माँ लक्ष्मी के प्रकट होने पर दीप जलाकर उनका स्वागत हुआ। तभी से दीपावली मनाई जाती हैं।

4. जैन धर्म के अनुसार- जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर इसी दिन बिहार के पावापुरी में अपना शरीर त्याग दिया था। तब से ही उनकी याद में दीप जलाया जाता हैं।

5. बौद्ध धर्म के अनुसार- बोद्ध धर्म के प्रवर्तक भगवान गौतम बुद्ध जब 17 साल बाद अनुयायियों के साथ अपने गृह नगर कपिल वस्तु लौटे तो लाखो दीप जलाकर उनका स्वागत किया गया।

6. सिख धर्म के अनुसार- अमृतसर (पंजाब ) में 1577 ईस्वी में स्वर्ण मंदिर का शिलान्यास हुआ था । और, इसके अलावा 1618 में दीवाली के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को बादशाह जहांगीर की कैद से जेल से रिहा किया गया था।

 यह भी पढ़े:

दीपावली मनाने के पीछे वैज्ञानिक कारण (Scientific reason behind celebrating Deepawali)

1स्वच्छता (साफ-सफाई )-

धार्मिक मान्यता के अनुसार लक्ष्मीपूजन और उनके स्वागत के लिए घर साफ सूथरा होना चाहिए । साफ- सफाई वाले स्थान पर ही माता लक्ष्मी का आगमन होता हैं। लेकिन इसके पीछे यह वैज्ञानिक मत है कि शरद ऋतु के आगमन से पहले गर्मी और बारिश का मौसम गुजर चुका होता हियन। गर्मी में तेज हवाओं और आंधीयों के चलते घर में धूल और गंदगी जमा हो जाती हैं।

बारिश के कारण घर का रंग-रोगन उतर जाता हैं। ऐसे में बीमारियाँ होने की आशंका बढ़ जाती हैं। तो साफ सफाई से कीट- पतंगों को भगा दिया जाता हैं। और रंग- रोगन में प्रयुक्त चूने और डिस्टेम्पर में उपस्थित कैल्सियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)2] कीटों व पतंगों को नष्ट केआर देता है, जिससे कि आगामी साल-भर के लिए कीट-पतंगे नष्ट हो जाये।

2. आँगन में गोबर लीपने का वैज्ञानिक कारण-

दीपावली से 2 दिन पहले आँगन को गोबर से लीपा जाता हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार गोबर में एंटि-बैक्टीरियल का गुण पाया जाता हैं । आँगन को गोबर से लीपने के बाद सारे जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे कि जीवाणु-जनित बीमारियाँ होने कि संभावना कम हो जाती हैं।

3. दीप जलाने के कारण-

दीप जलाने के पीछे विभिन्न धार्मिक कारण हो सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिक कारण यह है कि तेल व घी के दीये जलाने से कीट-पतंगे इससे आकर्षित होकर इसके धुएँ से मर जाते हैं । जिससे कीट – पतंगों से होने वाली बीमारियाँ अब नही होती हैं। इसके पीछे दूसरा वैज्ञानिक कारण यह भी हैं कि घी व तेल के दीये जलाने से ऑक्सीज़न (O2) गैस उत्पन्न होती हैं, जो कि हमारे श्वसन क्रिया के लिए आवश्यक होती हैं।

4. मिष्टान्न बनाने का कारण-

त्योहार पर मिष्टान्न बनाने के लिए घी का प्रयोग होता हैं । शुद्ध घी युक्त मिष्टान्न के सेवन से हमारे शरीर कि पाचन शक्ति बढ़ती हैं । शुद्द घी भोजन के पाचन में सहायक होता है, और इसमे उपस्थित वसा हमारे शरीर के लाभदायक होती है।

हमें अपने त्यौहारों के धार्मिक व वैज्ञानिक कारण जानने चाहिए, जिससे कि हम मोमबत्ती और प्रकाश की कृत्रिम सजावट करने से बचें और मिट्टी के दीये खरीदकर घी व तेल के दीये जलाए। बाज़ार कि मिठाइयों की बजाय घर पर ही शुद्ध घी कि मिठाइयाँ बनाए।
हमें अपनी संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए। दीपावली के इस पावन महोत्सव से हमें कुमार्ग से सदमार्ग की ओर तथा अंधकार से प्रकाश की ओर प्रेरणा मिलती है। दीपावली (प्रकाश), असत्य पर सत्य की विजय, अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक हैं।

आपने इस पोस्ट में पढ़ा कि, दीपावली का त्योहार कब मनाते हैं, हम दीपावली क्यों मनाते है, दीपावली मनाने के धार्मिक कारण, दीपावली मनाने के पीछे वैज्ञानिक कारण। अगर कोई जानकारी छूट गयी है, तो हम क्षमा प्राथी हैं।


Query:

Diwali manane ke peeche karan 

दीपावली मनाने के वैज्ञानिक कारण 

दिवाली मनाने के कारण

Reason behind celebriting diwali

Reason behind diwali celebration






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जानिए बाजरे के फायदे हिन्दी में (Hindi me jane bajre ke fayde)

Hindi me janiye bajre ki roti khaane ke kya kya fayde hai- 


बाजरा (पर्ल मिल्लट

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का हमारे ब्लॉग में हार्दिक स्वागत है। 

इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से जानेंगे कि बाजरे या बाजरे की रोटी से क्या फायदे होते है-हिन्दी में जानकारी। bajre ki roti ke sevan karne ke fayde- hindi me jankari. Bajre ke fayde. बाजरे के फायदे।

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जानिए अपने देश की शिक्षक प्रशिक्षण प्रणाली

जानिए अपने देश की शिक्षक प्रशिक्षण प्रणाली

हमारे देश में शिक्षक बनने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (Teacher Training Program) जैसे- BSTC, B.Ed., B.P.Ed., B.A.Ed. आदि कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

Teacher Education System in India

इन सभी कार्यक्रमों के संचालन
, नियमन, नियंत्रण व नीति निर्माण के लिए एक संस्था गठित की हुई है, जो कि NCTE (National Council of Teacher Education/ राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) के नाम से जानी जाती है।

एक रिपोर्ट के अनुसार हमारे देश में एनसीटीई से मान्यता प्राप्त लगभग 17000 शिक्षक शिक्षा संस्थान (Teacher’s Education Institutes- TEIs) संचालित हो रहे हैं, जो कि D.El.ED. (Diploma in Elementary Education) और B.Ed. (Bachelor of Education) जैसे कार्यक्रमों का संचालन कर रहे हैं।
इन 17000 कॉलेजों से प्रतिवर्ष 19 लाख फ्रेश प्रशिक्षित शिक्षक तैयार होते हैं। लेकिन, हमारी शिक्षा व्यवस्था के संचालन में केवल प्रतिवर्ष 3 लाख नए शिक्षकों की जरूरत पड़ती है। फिर भी हमारे देश की सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली है।
देश को प्रतिवर्ष 19 लाख नए प्रशिक्षित शिक्षक मिलने के बावजूद भी हमारी सरकार नव सृजित 3 लाख पदों को नहीं भर पा रही है। साथ ही निरंतर प्रशिक्षित बेरोजगारों की संख्या भी बढ़ रही है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार  हाल ही के कुछ वर्षों में CTET यानि Central Teacher Eligibility Test (केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा), जो कि केन्द्रीय शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए एक पात्रता परीक्षा है, की परीक्षा में भाग लेने वाले कुल अभ्यर्थियों में से 25% ही इस परीक्षा को पास कर सकते है।आपके अनुसार इसका क्या कारण हो सकता है?
मुझे इसके पीछे प्रशिक्षण कार्यक्रम में कमियाँ नज़र आ रही है। इसके नियोजन, नियमन, नीति निर्माण व संगठनात्मक संरचना में कमी नजर आ रही है, जिसके लिए एक ही संस्थान एनसीटीई उत्तरदायी है।
एनसीटीई को इन कारकों पर ध्यान देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार लाना चाहिए।
आजकल एनसीटीई से मान्यता प्राप्त कई कॉलेज प्रशिक्षणार्थियों को कॉलेज न आने की सलाह देकर, 75% उपस्थिति पूरी नहीं करने पर परीक्षा से वंचित होने का पहले से डर दिखाकर या समय पर क्लास नहीं लगाकर उनका समय बर्बाद करके डोनेशन (Donation) के रूप में उनसे भारी राशि वसूलते है।
नव प्रवेशित प्रशिक्षणार्थियों को पूरे नियम भी पता नहीं होते है,इस तरह शिक्षा क्षेत्र व्यवसाय का माध्यम और भ्रष्टाचार का वाहक बन चुका है।


यह भी पढ़िये-


आज के समय में इंसान की मूलभूत आवश्यकताओं रोटी, कपड़ा और मकान के बाद चौथी मूलभूत आवश्यकता है शिक्षा (Education)। यदि शिक्षा क्षेत्र भ्रष्टाचार से यूं ही लिप्त रहा तो निम्न वर्ग के लिए उच्च शिक्षा पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी हो जाएगा, वह उच्च शिक्षा की कल्पना भी नहीं कर पाएगा।

पूरे देश में सबसे ज्यादा TEIs उत्तरप्रदेश राज्य में संचालित हो रहे हैं, जो कि देश के कुल TEIs के एक तिहाई है। इसके बाद सर्वाधिक TEIs राजस्थान राज्य में स्थापित है। इन संस्थानों में से ज़्यादातर संस्थान शिक्षक प्रशिक्षण के नाम पर एक छोटे से दुकान रूपी ढाबे में ले बैठे है।

जब तक शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक अपने देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना नामुमकिन है। शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता, शिक्षक की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।
अर्थात-

"The quality of Education system is directly proportional to the quality of Teacher Education."


कैसे हो सुधार ?

1.पूरे देश में शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबन्धित आंकड़ों का संग्रहण किया जाये, तथा उनका विश्लेषण कर नयी योजनाएँ तैयार की जाये।
2.शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में कुछ इस प्रकार बदलाव किया जाये कि वह वैश्विक स्तर पर मान्य एवं गुणात्मक हो।
3.TEIs में सरकारी संस्थानों की भागीदारी बढ़ाई जाये तथा इसके विपरीत निजी संस्थानों की संख्या घटाई जाये या स्थिर रखी जाये।
4.एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व के 70 देश ऐसे है, जहां शिक्षकों की भारी कमी (Shortage) है, हमारी सरकार को उन देशों की सरकार के साथ मिलकर रोजगार की नयी दिशा में कदम उठाना चाहिए।

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World Heritage Day: क्यों और कब से मनाया जाता है विश्व धरोहर दिवस

 यूनेस्को प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को ‘व‌र्ल्ड हेरिटेज डे’ के रूप में मनाता है| इस दिन विश्व के सांस्कृतिक-ऐतिहासिक स्थलों और विरासतों को आने वाली पीढ़ी के लिए संरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है| लोग दुनियाभर से ऐसे ऐतिहासिक स्थलों और विरासतों को देखने के लिए आते है, जिससे प्राकृतिक धरोहरों के बारे में नयी पीढ़ी को जानकारी होती है, जो की आगे की पीढ़ी में विस्तारित होती है| विरासतों को सुरक्षित रखने के लिए यह यूनेस्को का जागरूकता अभियान है, जिससे सारे देश इस तरफ ध्यान दे और अपने- अपने देश की विरासत को बनाये रखे|

World heritage day


विश्व धरोहर स्थल

वह स्थान जो सांस्कृतिक महत्व और प्राकृतिक महत्व का केंद्र होते है, जो ऐतिहासिक और पर्यावरण को सजोये रखते है ऐसे स्थलों को विश्व धरोहर स्थल कहा जाता है| यह स्थल लगभग प्रत्येक देश में होता है| इन स्थलों का अंतरराष्ट्रीय महत्व होता है| जो कि पर्यावरण स्तर को भी बनाये रखते है| इन स्थानों की पहचान संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को के द्वारा की जाती है जिसके बाद इन्हें विश्व धरोहर की मान्यता प्रदान की जाती है| मान्यता देते समय यूनेस्को देखता है, कि वह स्थल मानवता के लिए आवश्यक है कि नहीं जिससे वहां की सांस्कृतिक और भौतिक महत्व को बनाये रखा जा सकता है|

व‌र्ल्ड हेरिटेज डे (World Heritage Day)

यूनेस्को ने सांस्कृतिक-ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विरासतों की विविधता और रक्षा के लिए 18 अप्रैल को व‌र्ल्ड हेरिटेज डे मनाने की घोषणा की थी| इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ माउंटेन्स एंड साइट ने 18 अप्रैल 1982 को विश्व धरोहर दिवस मनाने का सुझाव दिया था| जिसके बाद नवंबर 1983 में यूनेस्को के 22वें सत्र में 18 अप्रैल को व‌र्ल्ड हेरिटेज डे के रूप में मनाने का प्रस्ताव पास किया गया|

ये भी पढ़ें: आखिर 14 नवंबर को ही क्यूं मनाया जाता है, बाल दिवस (Children's Day)

धरोहर संरक्षण कार्य

किसी भी धरोहर को संरक्षित करने का कार्य अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद और विश्व संरक्षण संघ के द्वारा किया जाता है| यह दोनों संस्था सांस्कृतिक-ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विरासतों के लिए विश्व धरोहर समिति से सिफारिश करती है | इस समिति की बैठक वर्ष में केवल एक बार आयोजित होती है| बैठक में समिति निर्णय लेती है कि वह विश्व धरोहर सूची में उस स्थान को सम्मिलित करे अथवा न करे| चयनित स्थानों, जैसे-वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन या शहर इत्यादि की देख-रेख यूनेस्को के सरंक्षण में की जाती है| विश्व में जुलाई 2024 तक कुल 1223 विश्व धरोहर स्थल हैं। इनमें से 952 सांस्कृतिक, 231 प्राकृतिक और 40 मिश्रित हैं।

भारत में धरोहर स्थल

वर्तमान समय में भारत में 30 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित सहित कुल 38 विश्व धरोहर स्थल हैं।

प्राकृतिक धरोहर स्थल

हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान संरक्षण क्षेत्र (2014)
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (1985)
केओलादेओ नेशनल पार्क (1985)
मानस वन्यजीव अभयारण्य (1985)
नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (1988)
सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान (1987)
पश्चिमी घाट (2012)
हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान संरक्षण क्षेत्र (2014)
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (1985)
केओलादेओ नेशनल पार्क (1985)
मानस वन्यजीव अभयारण्य (1985)
नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (1988)
सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान (1987)
पश्चिमी घाट (2012)

सांस्कृतिक धरोहर स्थल

आगरा का किला (1983)
अजंता की गुफाएं (1983)
नालंदा महाविहार (नालंदा विश्वविद्यालय), बिहार (2016)
सांची बौद्ध स्मारक (1989)
चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्विक पार्क (2004)
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (पूर्व में विक्टोरिया टर्मिनस) (2004)
गोवा के चर्च और कॉन्वेंट्स (1986)
एलिफेंटा की गुफाएं (1987)
एलोरा की गुफाएं (1983)
फतेहपुर सीकरी (1986)
ग्रेट लिविंग चोल मंदिर (1987)
हम्पी में स्मारकों का समूह (1986)
महाबलिपुरम में स्मारक समूह (1984)
पट्टडकल में स्मारक समूह (1987)
राजस्थान में पहाड़ी किला (2013)
हुमायूं का मकबरा, दिल्ली (1993)
खजुराहो में स्मारकों का समूह (1986)
बोध गया में महाबोधि मंदिर परिसर (2002)
माउंटेन रेलवे ऑफ इंडिया (1999)
कुतुब मीनार और इसके स्मारक, दिल्ली (1993)
रानी-की-वाव पाटन, गुजरात (2014)
लाल किला परिसर (2007)
भीमबेटका के रॉक शेल्टर (2003)
सूर्य मंदिर, कोणार्क (1984)
ताज महल (1983)
ला कॉर्ब्युएर का वास्तुकला कार्य (2016)
जंतर मंतर, जयपुर (2010)



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Introduction to BIOLOGY

Introduction to BIOLOGY

 Biology :- The branch of science which deals with the study of living organisms is called Biology.


‘BIOLOGY’ is a Greek word. This word is formed by 2 words (BIOS & LOGOS).

BIOS :- LIFE

LOGOS :- STUDY

 So, Biology means ‘Study of Life’.

Biology’ term was firstly coined by Lamarck & Treviranus in 1802.·       Further, Biology is mainly divided into 2 parts-

  1. Botany
  2. Zoology

Father of –
·       Biology- Aristotle
·       Zoology- Aristotle
·       Botany- Theophrastus



Also read


1. मेंहनत, संघर्ष और लग्न से नामुमकिन भी हो जाता है मुमकिन...!!!

 Basic Terminology Related to BIOLOGY-


·       Agrostology- Study of Grasses.
·       Anatomy- Study of Internal Structure of Organisms.
·       Andrology- Study of Male Reproductive Organs.
·       Apiculture- Rearing of Honey Bees.
·       Arthrology- Study of Joints.
·       Bacteriology- Study of Bacteria.
·       Bryology- Study of Bryophytes.
·       Cardiology- Study of Heart.
·       Cytology- Study of Cells.
·       Dermatology- Study of Skin.
·       Ecology- Study of Co-relation between Environment & Living Organisms.
·       Entomology- Study of Insects.
·       Floriculture- Flower Farming.
·       Genetics- Study of heredity of Genetic Characters in Organisms.
·       Haematology- Study of Blood.
·       Hepatology- Study of Liver.
·       Microbiology- Study of micro-organisms like Bacteria, Fungi etc.
·       Morphology- Study of External Structure of Organisms.
·       Mycology- Study of Fungi.
·       Neonatology- Study of New Born Babies.
·       Neurology- Study of Nervous System.
·       Odontology- Study of Teeth & Gums.
·       Oncology- Study of Cancer & Tumor.
·       Ophthalmology- Study of Eyes.
·       Ornithology- Study of Birds.
·       Osteology- Study of Bones.
·       Phycology- Study of Algae.
·       Physiology- Study of Functions of Organ-systems in Living Organisms.
·       Pisciculture- Culturing of Fishes.
·       Virology- Study of Viruses.
  Ø ZOOLOGY-
         ·       The branch of biology, in which we study about structure & various functions of animals is called Zoology.
         ·       Zoology is a Greek word. It is formed by 2 words(Zoon + Logos)
      Zoon- Animal
     Logos- Study
         ·       So, Zoology means Study of Animal Kingdom.
         ·       Famous philosopher Aristotle was a first person who composed a book named ‘Historia Animalium’. In this book, he described about Structure, Nature & Reproduction in Animals. He also classified to Animals. So, Aristotle is known as Father of Zoology.
         ·       But Binomial Nomenclature System was proposed by Carolus Linnaeus & he presented Modern Classification of living organisms into his book ‘Systema Naturae’.
         ·       So, he (Linnaeus) in known as ‘Father of Modern Taxonomy’.
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  Ø Botany-
            ·       The branch of biology, in which we study about structure of plants & their various biological functions is called Botany.
            ·       The term ‘Botany’ was derived from Greek word ‘Botane’.
            ·       ‘Botane’ means Plants/ Herbs/weeds.
            ·       Firstly, Theophastus classified to Plant Kingdom on the basis of their properties, shape & size.
           ·       So, he (Theophrastus) is known as ‘Father of Botany’.

For any query & suggestions please contact at: goswamychandan1998@gmail.com


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Father of Zoology 

Father of Botany 

Basic Biology 

Fundamentals of Biology

'Biology' term derived from

Biology term given by 

Branches of biology 

Basics of Biology 

Basics of life Sciences

Branches of science 

Cardiology Branch 

Oncology branch.














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अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस विशेष (International Teachers Day Special)

 

 जानिए, कब और क्यूँ मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस  


 सर्वप्रथम सभी शिक्षक बंधुओं को मेरा सादर प्रणाम एवं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई।

जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि जिस तरह से हमारे स्वतंत्र भारत देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति स्वर्गीय श्री डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती (5 सितंबर) को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता हैं, उसी तरह से विश्व (अंतर्राष्ट्रीय) स्तर पर 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस या अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

  इस दिन कार्यरत एवं सेवानिवृत शिक्षक बंधुओं को उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है। और शिक्षकों की स्थिति के सुधार के लिए प्रयास किए जाते हैं।

5 अक्टूबर को ही क्यूँ मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस ?

संयुक्त राष्ट्र (UN) के द्वारा साल 1966 में 5 अक्टूबर को युनेस्को (UNESCO) और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की संयुक्त बैठक आयोजित की गयी थी और उस बैठक में शिक्षकों की स्थिति पर चर्चा हुई थी। उसी बैठक की यादगार को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के तौर पर मनाया जाता है। पहली बार अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस साल 1994 में मनाया गया, इस तरह आज 5 अक्टूबर 2022 को यह 28 वां अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस है।

लेकिन आज भी शिक्षकों की स्थिति पर चर्चा ही होती है, कोई सुधार के प्रयास तो चर्चाओं और बैठकों तक ही सीमित रहते है।

कैसे सुधर सकती है शिक्षकों की स्थिति ?

आर्थिक स्थिति- शिक्षकों की आर्थिक स्थिति तभी सुधार सकती है, जब वे इसके बारे में वे खुद सोचे और गंभीरता के साथ इस मुद्दे का हल ढूँढे । आज के युग में दूसरों पर निर्भर रहना मूर्खता है। जैसा कि हमारे देश की सरकार ने GDP में गिरावट लाकर आत्मनिर्भरता (Self Dependence ) के विचार प्रकट कर दिये हैं। आपके लिए यहीं बेहतर होगा कि आप आत्मनिर्भरता को यथाशीघ्र स्वीकार कर ले। यदि यह बात कड़वी लगी हो तो समझ लीजिये यहीं आपके लिए सच्चाई है।

सामाजिक स्थिति- समय के साथ मुझे भी यह बात समझ में आयी कि समाज मनुष्य के जीवन का अभिन्न हिस्सा है, सिर्फ अपने काम से तालुकात रखना ही जीवन नहीं है, समाज के लिए भी कुछ करना मनुष्य का परम कर्तव्य है। लेकिन अपवादस्वरूप हर समाज में असामाजिक तत्व (Anti Social Elements) होते हैं। उनकी बातों में आकर कोई समाज विरोधी कार्य करने से बेहतर होगा कि आप कुछ भी न करे। सभी शिक्षक बंधु विद्वान है, इसलिए इस विषय पर उन्हे ज्यादा बताने की आवश्यकता नहीं हैं। अगर वे ठान ले तो असामाजिक तत्व भी पैदा नहीं होंगे। यदि आप इतना भी प्रयास कर ले तो आपकी सामाजिक स्थिति अपने आप ही बेहतर हो जाएगी। समाज को शिक्षित करने वाले भी आप ही है।

एक बार पुनः सभी शिक्षक बंधुओं को मेरा सादर प्रणाम। पोस्ट को पूरा पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद। किसी प्रकार की त्रुटि एवं कमी से संबन्धित आपके सुझाव कमेन्ट बॉक्स में सादर आमंत्रित हैं।

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जानिए, आखिर 14 नवंबर को ही क्यूं मनाया जाता है, बाल दिवस (Children's Day)

नमस्कार, दोस्तों,

आज के इस Blog Post में हम बात करने वाले है एक ऐसे टॉपिक की, जिसके बारे में हरेक Student को जानना जरूरी है। आज का हमारा टॉपिक है, 14 नवंबर को ही क्यूं मनाया जाता है, बाल दिवस.

जानिए 14 नवंबर को ही क्यों मनाया जाता है बाल दिवस (Children’s Day ) 


आज 14 नवंबर को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन है। इस दिन को देश में Children’s Day यानि बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी के बाद देश में वर्ष 1964 से पहले तक बाल दिवस 20 नवंबर को मनाया जाता था, लेकिन 1964 से इसे 14 नवंबर को मनाया जाने लगा। ऐसा क्यों हुआ, आइए हम आपको बताते हैं।


जानिए क्यों मनाते थे 20 नवंबर को ही बाल दिवस


संयुक्त राष्ट्र ने 20 नवबंर को बाल दिवस के रूप में घोषित किया था। इसी को देखते हुए भारत में भी आजादी के बाद 20 नवंबर को Children’s Day के रूप में मनाया जाने लगा। भारत में आजादी के बाद पहला बाल दिवस वर्ष 1959 में मनाया गया था। लेकिन वर्ष 1964 में प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद इसे बदल कर उनके जन्मदिन वाले दिन यानी 14 नवंबर को मनाया जाने लगा। दुनिया के कई देश आज भी 20 नवंबर को ही बाल दिवस मनाते हैं।



क्यों चुना गया पंडित नेहरू के जन्मदिन की तारीख


पं जवाहर लाल नेहरू को बच्चों से बेहद प्यार था। जब भी वे खाली रहते तो अपना समय बच्चों के साथ बिताया करते थे। वे हमेशा इन बच्चों को देश के भविष्य के रूप में देखते थे, इसलिए बच्चों को उनके मौलिक अधिकार खासतौर शिक्षा दिलाने के पक्षधर थे। ताकि देश की एक मजबूत नींव तैयार हो सके। देश के आजाद होने के बाद जब पं नेहरू ने पहले प्रधानमंत्री के रूप में देश की कमान संभाली, तो बच्चों की शिक्षा उनकी प्राथमिकता पर थी।


उन्होंने विभिन्न शैक्षिक संस्थानों जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और भारतीय प्रबंधन संस्थान आदि की स्थापना की व युवाओं के लिए रोजगार को बढ़ावा देने के लिए देश को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाई। पं नेहरू ने पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ कर भारत में उद्योग के नए युग की शुरूआत की। शिक्षा के क्षेत्र में नेहरू के इस योगदान व बच्चों के प्रति उनके प्रेम को देखते हुए उनकी मृत्यु के बाद देश में उनके जन्मदिन की तिथि यानी 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। 

बाल दिवस २०२१

बाल दिवस 2024

बाल दिवस कब मनाया जाता है?

बाल दिवस मनाने के कारण 

14th November (Children's Day Special)

When is Children's Day Celebrated?

Why is Children's Day Celebrated ?

Children's Day Celebration





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